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यीशु

यीशु ने अपने शब्दों के बारे में क्या कहा?

नमस्ते

यीशु ने कहा कि उसके शब्द सीधे परमेश्वर की ओर से आते हैं। और उन्होंने यह बात सिर्फ एक बार नहीं कही:

“मेरा उपदेश मेरा नहीं, वरन मेरे भेजनेवाले का है।” (यूहन्ना 7:16)

“…जिसने मुझे भेजा है वह सच्चा है, और जो कुछ मैंने उससे सुना है, वही मैं जगत को बताता हूँ।” (यूहन्ना 8:26)

“जो बातें मैं तुम से कहता हूँ, वे अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।” (यूहन्ना 14:10)

“…जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं, परन्तु पिता का है, जिस ने मुझे भेजा है।” (यूहन्ना 14:24)

“क्योंकि मैं ने अपनी ओर से कुछ नहीं कहा, परन्तु पिता जिस ने मुझे भेजा है, उसी ने मुझे आज्ञा दी है कि क्या क्या बोलूं और क्या क्या बोलूं। और मैं जानता हूं कि उसकी आज्ञा अनन्त जीवन है। इसलिये मैं जो कुछ कहता हूं, वह वैसा ही कहता हूं जैसा पिता ने मुझसे कहा है।” (यूहन्ना 12:49-50)

(प्रार्थना करते हुए) “क्योंकि मैंने उन्हें (शिष्यों को) जो शब्द आपने मुझे दिये थे, उन्होंने उन्हें स्वीकार कर लिया। वे निश्चय से जानते थे कि मैं आप से आया हूँ, और उन्होंने विश्वास किया कि आपने ही मुझे भेजा है।(यूहन्ना 17:8 )

 

यीशु ने कहा कि उसके शब्द आत्मा और जीवन हैं…

“आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर तो व्यर्थ है; जो बातें मैं ने तुम से कहीं हैं वे आत्मा हैं, और जीवन भी।” (यूहन्ना 6:63)

 

…और उनके शब्द सदैव जीवित रहेंगे…

“आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी।” (मत्ती 24:35; मरकुस 13:31; लूका 21:33)

 

… और पवित्र आत्मा उसके शिष्यों को उसकी कही हुई बातें याद दिलाएगा,

“सहायक अर्थात् पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।” (यूहन्ना 14:26)

 

हमारा प्रेमी पिता अपने प्रिय पुत्र यीशु के शब्दों के माध्यम से हमसे बात करे।

 

पीटर ओ

 

संबंधित आलेख।

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